रॉकी, राखी, राजू और शिवा जिसकी नाक पर आज भी रस्सी के बेरहम बंधन के निशान मौजूद हैं, आखिरकार अब सुरक्षित हैं।

कहा जाता है कि सबसे खूबसूरत सफर वह होता है जो आपको अपने घर तक पहुंचा दे, और हाल ही में हमारे अभयारण्यों में पहुंचे ये चार नए निवासी इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। सांगली अभयारण्य में रहने वाला शिवा, एक वृद्ध बैल, अब अपने नए देखभालकर्ताओं पर भरोसा करना सीख रहा है। पहले उससे लगातार कड़ी मेहनत कराई जाती थी, और उसकी नाक में बंधी रस्सी इतनी कसकर कसी जाती थी कि उसके गहरे निशान आज भी साफ दिखाई देते हैं।
वहीं, खूबसूरत टट्टू राखी दिल्ली में गाड़ी खींचने वाले पशुओं के स्थान पर मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने संबंधी PETA इंडिया के अभियान के तहत रणापुर अभयारण्य पहुंची। दूसरी ओर, टट्टू राजू और कुत्ता रॉकी को न्यू मोमोता सर्कस में “सर्कस पशु” के रूप में रखा गया था, जहां उनसे सज़ा के डर से कठिन और असहज करतब करवाए जाते थे। PETA इंडिया की कार्रवाई के बाद उन्हें वहां से मुक्त कराया गया और कोलकाता अभयारण्य लाया गया। रॉकी को बचाने वाला व्यक्ति कुछ समय तक उसके साथ रहा, ताकि वह अपने नए वातावरण और जीवन के साथ सहजता से तालमेल बिठा सके। इसी दौरान एनिमल राहत के पशुचिकित्सक उसकी नसबंदी शल्य-चिकित्सा की तैयारी कर रहे थे। यह उन 245 नसबंदी प्रक्रियाओं में से एक थी जिन्हें हमारी टीम ने इस महीने सफलतापूर्वक पूरा किया।

आप भी मदद कर सकते हैं

एनिमल राहत को दिया गया आपका सहयोग इन पशुओं और इनके जैसे कई अन्य पशुओं के जीवन में बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है। चाहे आप किसी गांव के कुत्ते के टीकाकरण में सहायता कर रहे हों, किसी घायल बैल के उपचार का खर्च वहन कर रहे हों, या नीचे दिए गए अन्य प्रायोजन अवसरों में से किसी के माध्यम से सहयोग कर रहे हों, आपकी उदारता का तुरंत और सार्थक प्रभाव पड़ेगा।

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