आज भी कई घोड़ों को शादियों की बारातों में बग्घियाँ खींचने और आतिशबाज़ी के शोर व तेज़ ढोल-नगाड़ों के बीच घंटों तक खड़े रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इनमें से कई घोड़े दर्दनाक चोटों और बीमारियों से जूझते हुए भी यह सब सहने को विवश होते हैं। “ओम” भी उन्हीं में से एक था।

ओम गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित था, यह एक बेहद दर्दनाक बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन और अकड़न हो जाती है। वर्षों तक कठोर सड़कों पर लगातार काम करने के कारण उसकी यह हालत हो गई थी। इसके बावजूद उससे भीड़भाड़ वाली सड़कों पर भारी शादी की बग्घी खिंचवाई जाती रही। तेज़ संगीत, ट्रैफ़िक और शोर-शराबे से घिरा ओम लगातार शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव सहने के लिए मजबूर था।
बारातों में इस्तेमाल किए जाने वाले घोड़े अक्सर जीन और पट्टों से बने गहरे घाव, काँटेदार लगाम (स्पाइक्ड बिट) से होंठों पर चोटें, सूजी हुई नसें (टेंडन) और वर्षों की कठिन मेहनत से क्षतिग्रस्त जोड़ों जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करते हैं। ओम ने भी यही सीखा था कि इंसानी हाथों का मतलब केवल दर्द होता है।
जब ओम को एनिमल राहत के आश्रय-स्थल में लाया गया, तो उसकी जीन और हार्नेस हमेशा के लिए उतार दिए गए। लेकिन वह किसी को भी अपने पास नहीं आने देता था। तब एनिमल राहत के देखभालकर्ताओं ने उसे वही दिया जिसकी उसे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी—शांति और धैर्य। दिन-ब-दिन ओम ने महसूस किया कि अब उससे कोई काम नहीं कराया जाता, उसे कोई आदेश नहीं दिया जाता। इसके बजाय उसके दर्द का इलाज किया जाता है, और उसे ताज़ा भोजन तथा साफ़ पानी दिया जाता है। कई सप्ताह बीत गए। फिर एक दिन ऐसा आया, जब ओम ने लोगों से दूर हटकर चलना बंद कर दिया।
आज ओम अपनी मर्ज़ी से हरी घास चरता है, आराम करता है और स्वतंत्र रूप से घूमता है। अब वह सुरक्षित है, आज़ाद है और सुकून भरा जीवन जी रहा है। लेकिन ओम जैसे अनगिनत घोड़ों को आज भी हमारी मदद की ज़रूरत है।
ओम जैसे घोड़ों के लिए, अपनी शादी में घोड़े की बग्घी के बजाय सजाई हुई कार या किसी अन्य पशु-मुक्त विकल्प का चयन करें। ऐसा उत्सव मनाएँ जो हर किसी के लिए खुशी लेकर आए, किसी भी जानवर के लिए पीड़ा नहीं।