भारत भर में हर दिन लाखों पशु अत्यधिक बोझ से लदी गाड़ियाँ, भारी सामान या गर्दन पर भारी गाड़ियां के जुएँ खींचने के लिए मजबूर होते हैं। इनमें से कई पशुओं को पर्याप्त आराम, भोजन या देखभाल भी नहीं मिलती। इस अंतरराष्ट्रीय कामकाजी पशु दिवस पर, आइए रुककर यह जश्न मनाएँ कि हमारे समर्थकों की मदद से एनिमल राहत ने इन मेहनतकश पशुओं के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया है।

2011 से, एनिमल राहत महाराष्ट्र की चीनी मिलों के साथ मिलकर बैलों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों की जगह मशीनी विकल्प अपनाने के लिए काम कर रहा है। इस प्रयास के तहत 26 चीनी मिलों में 18,850 से अधिक ट्रैक्टरों/ट्रकों और 270 हार्वेस्टरों की तैनाती में सहयोग किया गया है, जिससे पशुओं पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। इसका परिणाम यह हुआ कि 11 लाख से अधिक बैलों को कठिन श्रम से राहत मिली है। 1,06,700 बैलों को कठिन श्रम से मुक्ति मिली। लेकिन एनिमल राहत का काम केवल गन्ने के खेतों तक ही सीमित नहीं है।

हमने 49 ईंट-भट्टों से 557 गधों को कठिन और शोषणपूर्ण श्रम से मुक्त कराया है। इन शांत और मेहनती पशुओं को कभी तपती धूप में घंटों तक भारी बोझ ढोने के लिए मजबूर किया जाता था। वे घाव, थकान और उपेक्षा का सामना करते हुए जीवन बिताते थे।
आज ये गधे हमारे आश्रयस्थलों में सुरक्षित, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं। वे धूप का आनंद लेते हैं, स्वादिष्ट भोजन खाते हैं, अपने साथियों के साथ खेलते हैं और भरपूर प्यार व देखभाल पाते हैं।

अब तक 38 घोड़ा-गाड़ियों और टट्टू-गाड़ियों की जगह मशीनी वाहनों ने ले ली है, जिससे परिवारों को पशुओं पर निर्भर हुए बिना आजीविका कमाने का अवसर मिला है। साथ ही, संवेदनशील और भावनाएँ महसूस करने वाले इन पशुओं को जीवनभर के कठिन श्रम और कष्ट से राहत मिली है।

महाराष्ट्र की चीनी मिलों के आधुनिकीकरण के लिए एनिमल राहत के प्रयासों के बाद, वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए 128 करोड़ 78 लाख रुपये की मंजूरी दी। यह योजना सभी राज्यों के लिए उपलब्ध है।
इस सहायता का उपयोग करके महाराष्ट्र सरकार लगभग 900 हार्वेस्टरों की खरीद पर अनुदान दे सकती है, जिससे करीब 50,000 बैलों को कठिन श्रम से मुक्ति मिल सकती है। हम राज्य सरकार से आग्रह करते हैं कि इस पहल को जल्द से जल्द लागू करे।

‘राहत’ का अर्थ है कष्टों से मुक्ति। आज यह शब्द उस हर बैल का है जो खुले मैदान में बिना बंधन के खड़ा है, उस हर गधे का है जिसने ईंटों के बोझ से मुक्त होकर धूप का आनंद लिया है, और उस हर घोड़े या टट्टू का है जो केवल अपनी इच्छा से दौड़ता है।
लेकिन अब भी लाखों कामकाजी पशु अपनी ‘राहत’ का इंतज़ार कर रहे हैं। जब तक हर कामकाजी पशु को शोषण, कष्ट और कठिन श्रम से मुक्ति नहीं मिल जाती, तब तक एनिमल राहत का प्रयास नहीं रुकेगा।