कर्नाटक के बेलगावी की सड़कों में एक सामुदायिक कुत्ता चार साल से भी अधिक समय तक गले में फंसी टूटी हुई स्टेनलेस-स्टील की केतली के साथ जीवन बिताता रहा। केतली के नुकीले और टूटे हुए किनारे उसकी गर्दन को काटते रहते थे। वह ठीक से खा नहीं पाता था और न ही आसानी से पानी पी पाता था। धातु के कारण उसके कानों के पीछे की त्वचा गहराई तक कट गई थी, जिससे वहाँ लगातार रिसते और संक्रमित घाव बन गए थे। वह हर दिन इस असहनीय पीड़ा को सहता रहा, क्योंकि कोई भी उसकी मदद नहीं कर पाया जब तक कि एनिमल राहत की टीम ने उसे राहत नहीं दिलाई।


एनिमल राहत के कर्मचारियों ने क्षेत्रीय दौरे के दौरान उसे देखा। उन्होंने धैर्यपूर्वक उसे खाने की चीज़ें देकर उसका विश्वास जीता और फिर उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले गए। वहाँ पशु चिकित्सकों ने सावधानीपूर्वक उसके गले से केतली हटाई, दोनों कानों के पीछे के दर्दनाक घावों को साफ़ कर उनका उपचार किया, तथा उसे वह चिकित्सकीय देखभाल, नसबंदी और टीकाकरण प्रदान किया जिसकी उसे लंबे समय से सख्त ज़रूरत थी। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके गाँव में वापस छोड़ दिया गया, जहाँ वह आखिरकार इस कष्ट से मुक्त होकर स्वतंत्र जीवन जी रहा है।
उसकी कहानी कोई नई बात नहीं है। केवल वर्ष 2025 में ही एनिमल राहत ने प्लास्टिक और धातु के फेंके गए कंटेनरों में फंसे 41 पशुओं को बचाया।
हर साल, इंसानों द्वारा लापरवाही से फेंके गए डिब्बों और कंटेनरों में सिर फंस जाने के कारण कई पशु पीड़ा झेलते हैं और अपनी जान गंवा देते हैं। एनिमल राहत सभी से अपील करता है कि वे पृथ्वी और उन पशुओं की भलाई के लिए, जिनके साथ हम इसे साझा करते हैं, अपने कचरे का जिम्मेदारी से निपटान करें और हमेशा जरूरतमंद पशुओं की मदद करें। किसी और की लापरवाही के कारण इस कुत्ते को चार साल से भी अधिक समय तक संघर्ष करना पड़ा। इस समय भी अनगिनत अन्य पशु इसी तरह संघर्ष कर रहे हैं। समुदाय में रहने वाले पशुओं के लिए कचरा मौत की सजा साबित हो सकता है। अपने धातु के डिब्बों को कुचल दें। खाली कंटेनरों को काटकर खोल दें। अपने कचरे को ऐसे डिब्बों में बंद करके रखें जिन्हें पशु चबा न सकें। दयालुता के छोटे-छोटे कदम भी किसी की जान बचा सकते हैं।