
यह 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस का दिन था, जब एनिमल राहत को एक ऐसी आपात सूचना मिली जिसे कोई भी नहीं भूल सकता। एक भैंस का बछड़ा गंदे नाले में गहराई तक गिर गया था। वह लगभग दिखाई ही नहीं दे रहा था, सिर्फ उसका चेहरा कीचड़ और कचरे की परतों के बीच से झलक रहा था। रेस्क्यू टीम ने नीचे झांककर स्थिति को समझा और तुरंत उसे बचाने का काम शुरू किया। फायर ब्रिगेड की अतिरिक्त मदद भी ली गई, और कुछ ही समय में वह नन्हा बछड़ा सुरक्षित रूप से ठोस जमीन पर आ गया, सतर्क, सुरक्षित और चमत्कारिक रूप से बिना किसी चोट के।

इस बछड़े का नाम द्रौपदी रखा गया, जो महाभारत की शक्तिशाली नायिका और एकता के भाव का प्रतीक है ठीक उसी तरह जैसे उसे बचाने के लिए सभी रेस्क्यू टीम एकजुट हुई थी।
आज द्रौपदी एनिमल राहत की सांगली सैंकचूरि में अपने जीवन का स्वतंत्रता दिवस मना सकती है, जहां वह टीम द्वारा बचाई गई पांच अन्य भैंसों के साथ सुरक्षित और खुशहाल जीवन जी रही है। उसे देखकर हर किसी का दिन रोशन हो जाता है, और अब वह सिर्फ प्यार और देखभाल का ही अनुभव करेगी कभी क्रूरता का नहीं।
धन्यवाद, कि आपने द्रौपदी जैसे अनमोल पशुओं के लिए हर दिन को एक त्योहार जैसा बना दिया।