महाराष्ट्र में, वहाँ यह राक्षसों का संहार करने वाली देवी मयक्का का मंदिर है, और उनके भक्त भारी तादात में हर साल यहां आते हैं। समस्या यह है कि एनिमल राहत द्वारा बसें उपलब्ध कराए जाने के बावजूद, ग्रामीण अक्सर बैलगाड़ी या यहां तक ​​कि बैल-और-खच्चर गाड़ी चलाते हैं, जो पशुओं के लिए एक कठिन होता है और कभी-कभी जानलेवा भी साबित होता है। इस वार्षिक “चिंचली मेले” में पशुओं को श्रद्धालुओं से भरी भारी भरकम गाड़ियां खींचकर इस मेले तक पहुँचने में कई दिन की पैदल ओर थकाऊ यात्रा करनी पड़ती है और इस दौरान गाड़ी वाहक उन्हें लगतार चाबुक या डंडों से मार कर निरंतर चलते रहने के लिए हाँकते रहते हैं। भक्त वहां पहुंचने के लिए इतने उत्सुक होते हैं कि वे बेचारे बैलों और खच्चरों को बहुत कम आराम देते हैं इसलिए बैलों में लंगड़ापन और थकावट आम बात है। लेकिन एनिमल राहत की बदौलत इस मार्ग पर हजारों पशुओं को महत्वपूर्ण राहत दी गई है।

एनिमल राहत द्वारा लगाए गए पशु शिविर में पशु आराम के लिए रुकते हैं।

थके हारे पशुओं के लिए आराम

एनिमल राहत ने रास्ते में चार बहुत ज़रूरी आराम और पशु चिकित्सा उपचार शिविर भी लगाए, जहां यात्रा के दौरान थके लोग कुछ पल रुक कर आराम के साथ साथ जलपान भी करते हैं जबकि बैल और खच्चर भी थकाऊ यात्रा से विश्राम लेकर राहत पाते हैं। पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने इस मेले में जाते हुए 790 पशुओं का जबकि मेले से लौटते हुए 810 पशुओं का इलाज किया। थके हुए पशुओं को पौष्टिक चारा और ताज़ा पानी दिया गया और एनिमल राहत के कर्मचारियों ने 220 पशुओं को चिकित्सा उपचार प्रदान किया – जिनमें से कई ऊबड़-खाबड़, पथरीली सड़कों, निर्जलीकरण और ओवरलोडेड गाड़ियों से मांसपेशियों के फटने के कारण दर्दनाक लंगड़ापन से पीड़ित थे।

एनिमल राहत के कर्मचारी उपचार से पहले, थके हुए बैल को शांत करने के लिए उसकी देखभाल कर रहे हैं।

क्रूरता का अंत : एक ही बार में 165 यातना उपकरण हटाए गए

enimaएनिमल राहत की टीम ने 165 पशुओं पर लगे यातना उपकरणों को जब्त किया, जिनमें वो औजार उपकरण शामिल थे जो इन बैलों को कस्थ पहुँचाने के लिए इस्तेमाल किएए जा रहे थे जैसे नुकीले सिलेंडर जो पशुओं दाय-बाय सिर घुमाने से रोकते हैं, नायलॉन की कसी हुई नाक की रस्सी जो उनकी नाक को लहू लुहान कर देती है, तथा चाबुक शामिल थे। उपकरणों को हाताने के साथ साथ, एनिमल राहत की टीम ने पशुओं पर ऐसे उपकरणों को लगाने की क्रूर प्रथाओं को समाप्त करने के तरीकों के बारे पोस्टर, प्रदर्शनी लगकार गाँव और दूर दराज से आने वाले लोगों को क्रूरता के मुद्दों पर जागरूक किया.

एनिमल राहत ने एक लंगड़े बैल और एक खच्चर के मालिक को इस बात के लिए राजी कर लिया कि इन बीमार और चोटिल बैलों से यात्रा जारी रखने के बजाय उन्हें जल्द से जल्द आराम दें, एनिमल राहत ने दो लंगड़े बैलों का इस्तेमाल करने वाले एक परिवार को भी पशु को आराम देने के लिए मना लिया और गाड़ी खींचने के काम से मुक्त करवाया ताकि इन पशुओं को ऐसी दुर्लभ हालत में कष्ठकरी काम करवाने से निजात दिलाई जा sआके. इसके साथ ही साथ अन्य लोगों और पुजारियों को पशु क्रूरता से जुड़े मुद्दों पर शिक्षित करने, तीर्थयात्रियों के लिए परिवहन की व्यवस्था करने में सहायता करने के लिए राज्य परिवहन बस डिपो के साथ समन्वय करने और यहां तक ​​कि बसों को सब्सिडी देने सहित एनिमल राहत ने हजारों पशुओं को जबरन कारवाई जाने वाली यात्रा से मुक्ति दिलाई.

वर्ष 2003 से, हर वर्ष एनिमल राहत इस मेले में जबरन गाड़ियां खींच कर लाए जाने वाले पशुओं की मदद कर रहा है। यह निरंतर प्रयास उन दान दाताओं के प्रयासों से सफल हो रहे हैं जो इस कार्य का समर्थन करते हैं।