
इस महीने टीम ने बड़े स्तर पर राहत और जागरूकता पहुंचाई: 2,545 पशुओं को मुफ्त पशु-चिकित्सा सेवा मिली, जिनमें घाव, लंगड़ापन, त्वचा और पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज शामिल था। 820 पशु मालिकों को मानवीय देखभाल और रोकथाम के तरीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही 289 छात्रों और 14 शिक्षकों ने ‘कंपैशनेट सिटिजन’ कार्यशालाओं में भाग लिया, जबकि 59 युवा लेखकों ने निबंध प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जिनके विषय थे जैसे “पक्षी पिंजरे में नहीं होने चाहिए” और “हाथी जंगल के हैं, जंजीरों के नहीं।”
टीम ने 99 नसबंदी सर्जरी कीं और 627 पशुओं का टीकाकरण किया, जिससे उन्हें रेबीज और टेटनस जैसी घातक बीमारियों से सुरक्षा मिली।क्लासरूम से लेकर क्लिनिक तक, हर आंकड़ा एक बदली हुई जिंदगी और एक अधिक करुणामय भविष्य की कहानी कहता है।