हालांकि भारत में कई साथी पशुओं के पास प्यार भरे घर हैं, लेकिन जो बेघर जीवन यापन कर रहे पशु जो हमारे समुदाय में हमारे आसपास पाए जाते हैं उन्हें “सामुदायिक पशु” माना जाता है, खासकर कुत्तों को। वे अक्सर गाँवों और कस्बों की सड़कों पर घूमते हुए पाए जाते हैं, और हमारे निवासी लोग ही उन्हें खाना और पानी देते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें बुनियादी पशु चिकित्सा देखभाल भी नहीं दे पाते हैं। एनिमल राहत को अक्सर अपने गाँव में बीमार, घायल या अनाथ पशुओं के लिए सहायता मांगने वाले चिंतित निवासियों से कॉल आते हैं। एनिमल राहत दर्दनाक पशुओं से संबंधित मिलने वाली हर कॉल का जवाब देता है, जैसे कभी कल आती है कि किसी पशु का सिर गेट में फस गया है या किसी पशु ने भोजन ढूँढ़ते समय खाली खाद्य कंटेनर में मुंह फसा लिया है।

जब एनिमल राहत सामूदायिक पशुओं के जीवन में हस्तक्षेप करता है, तो यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें भरपूर भोजन और ताज़ा पानी मिले। जब भी संभव हो, टीम के सदस्य पशुओं को नसबंदी और टीकाकरण के लिए अपने ऑफिस में लाते हैं और उन्हें सर्जरी व देखबहाल के बाद जब वह swaस्वस्थ हो जाते हैं तो उन्हें गाँव में वापस भेजने या किसी स्थानीय परिवार द्वारा उन्हें गोद लेने की व्यवस्था करने से पहले उन्हें खाने-पीने की चीज़ें, लंबे समय से लंबित देखभाल और ढेर सारा स्नेह प्रदान करते हैं।

साथी पशुओं के लिए एनिमल राहत के अधिकतम अभियान नसबंदी अभियानों पर केंद्रित है। पशु चिकित्सकों और उनके सहायकों की टीमें महाराष्ट्र के शहरों और गांवों में जाती हैं, पशुओं की नसबंदी करती हैं ताकि वे सड़कों पर खतरनाक जीवन जीने के लिए पशुओं की संख्या कम हो सके।
कई बार हमारी टीम जब पूरी तयारी के साथ बाहर निकलती है तो कई दिनों के अभियान में एक साथ 100 से ज़्यादा कुत्तों की नसबंदी करके ही वापिस लौटती है। एनिमल राहत के इस व्यवस्थित अभियान के चलते 20 से ज़्यादा गाँवों ने अब अपने क्षेत्र के 100% कुत्तों के नसबंदी कर ली है! जब भए किसी गाँव में 100% संख्या को पूर्ण कर लिया जाता है तो गाँक के लोग इस तरह एक बैनर के साथ इसका प्रदर्शन करते हैं।






